Friday, January 25, 2008

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

कामना

नहीं चाहती राज्य जगत का,
न ही स्वर्ग का सुख भोग।

नहीं मोक्ष की मुझे कामना,
और न ही कीर्ति का है मोह॥

यही चाह है जब तक जिऊँ,
कहता है मेरा यह मन।

मातृ भूमि की सेवा मेँ ही,
सदा बिताऊँ निज जीवन॥

(यह किविता १९९४ मे लिखी गयी)